World Indigenous Day. | 9 अगस्त विश्व मूलनिवासी दिवस. समझिए पूरा इतिहास पढे |

Shailesh Pawara | शैलेश पावरा | pawara Shailesh
9 August World Indigenous Day.

9 अगस्त विश्व मूलनिवासी दिवस.

मूल निवासियों के हक अधिकार दिलाने और उनकी समस्याओं का निराकरण भाषा संस्कृति इतिहास को संरक्षण देने हेतु.

Unted Nations Working Grup of Indigenous populations.

मूल निवासियों के मानव अधिकारों को लागू करने और उनके संरक्षण के लिए यूएनओ  संयुक्त राष्ट्र दल ने ( UNWGIPUnted Nations Working Grup of Indigenous populations  नामक  उप-आयोग  का गठन किया.  जिसकी पहली बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी..

9 अगस्त को "विश्व मूलनिवासी दिवस मनाने का निर्देश".

इसलिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को "विश्व मूलनिवासी दिवस "  याने  "International Day Of The World's Indigenous People's " अपने कार्यालय में एवं अपने सदस्य देशों को मनाने का निर्देश है.

विश्व के मूल निवासियों की स्थिति की समीक्षा और चर्चा.

मूलनिवासी समाज की समस्याओं के निराकरण हेतु विश्व के देशों का ध्यान आकर्षण करने के लिए सबसे पहले यूएनओ ने 1982 में होने वाले सम्मेलन के 300 पन्नों के एजेंडे में 40 विषय रखें जो चार भागों में बांटे गए तीसरे भाग में रियो-डी- जनेरो ब्राजील सम्मेलन में विश्व के मूल निवासियों की स्थिति की समीक्षा और चर्चा कर प्रस्ताव पारित किया यू एन ओ में यह महसूस किया कि 21वीं सदी में भी विश्व के विभिन्न देशों में निवासरत मूलनिवासी समाज अपनी उपेक्षा बेरोजगारी एवं बंधुवा बाल मजदूर जैसी समस्याओं से ग्रसित है .

मूल निवासियों को हक अधिकार. और पूरा इतिहास.

1993 में UNWGIP  कार्य दल के 11 वे अधिवेशन में मूलनिवासी घोषणा प्रारूप को मान्यता मिलने पर " 1994 को मूलनिवासी वर्ष  " व  "09 अगस्त को मूलनिवासी दिवस " घोषित किया अतः मूल निवासियों को हक अधिकार दिलाने और उनकी समस्याओं का निराकरण भाषा संस्कृति इतिहास के संरक्षण के लिए UNO की महासभा द्वारा 9 अगस्त 1994 को जेनेवा मे विश्व के  मूल निवासी प्रतिनिधियों का विशाल एवं विश्व का प्रथम अंतरराष्ट्रीय मूलनिवासी दिवस का सम्मेलन आयोजित किया गया मूल निवासियों की संस्कृति भाषा उनके मूलभूत हक्क अधिकारों को सभी ने एकमत से स्वीकार किया और उनके सभी हक अधिकार बरकरार रहे इस बात की पुष्टि कर दी गई तथा UNO ने " हम आपके साथ हैं." यह वचन मूल निवासियों को दिया गया.

प्रथम मूल निवासी दशक.

UNO ने व्यापक चर्चा के बाद 21 दिसंबर 1994 से 20 दिसंबर 2004 तक "प्रथम मूल निवासी दशक " मनाया विश्व में इस दिवस को मनाया जाने लगा किंतु अफसोस भारत की सरकारों ने इस दिन के बारे में आज तक किसी को नहीं बताया और ना ही आज तक मनाया जबकि UNO ने  दिसंबर 2004 से 15 दिसंबर 2014 तक फिर दूसरा मूलनिवासी दशक घोषित किया यूएनओ द्वारा पिछले 22 वर्षों से निरंतर मूलनिवासी दिवस मनाया जा रहा है.

संगठन बामसेफ द्वारा विश्व मूलनिवासी दिवस" बडी धुमधाम से मनाया जाएगा.

किंतु भारत के मूलनिवासी बहुजन को इसकी कोई जानकारी नहीं है इसी के मद्देनजर बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने 2006 में 23 जुलाई 26 जुलाई 1 अगस्त में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया है व पूरे देश के मूल निवासियों (SC/ST/OBC) मे जन जागरण का तुफान ला दिया है.संगठन बामसेफ की अपील  द्वारा इस वर्ष 09 अगस्त  2023 को  देश के कोने कोने में गांव-गांव में मोहल्ले मोहल्ले  में " विश्व मूलनिवासी दिवस" बडी धुमधाम से  मनाया जाएगा.

जय मूलनिवासी..जय आदिवासी.. जय जोहार...

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